
CHAPTER 55
यथार्थ ने जब अर्थांत को प्राप्ति को प्रताप विला से ले जाते देखा, तब उसे यकीन नहीं हुआ था कि सच में वो अर्थांत ही था, उसका भाई ही था, जो उस हँसती-खेलती दुनिया को बर्बाद करने के रास्ते पर चल पड़ा था।

CHAPTER 55
यथार्थ ने जब अर्थांत को प्राप्ति को प्रताप विला से ले जाते देखा, तब उसे यकीन नहीं हुआ था कि सच में वो अर्थांत ही था, उसका भाई ही था, जो उस हँसती-खेलती दुनिया को बर्बाद करने के रास्ते पर चल पड़ा था।
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