
CHAPTER 47
यथार्थ इस वक़्त अपने कमरे में आँखों पर हाथ रखे बेड पर लेटा था। उसका ध्यान जैसे गहरे समुद्र में गहराई की तलाश में कहीं खोया था। सूरज की हल्की रोशनी उसे अपनी आँखों पर महसूस हो रही थी पर इस वक़्त आँखों से ढका अंधेरा ज़्यादा था।

CHAPTER 47
यथार्थ इस वक़्त अपने कमरे में आँखों पर हाथ रखे बेड पर लेटा था। उसका ध्यान जैसे गहरे समुद्र में गहराई की तलाश में कहीं खोया था। सूरज की हल्की रोशनी उसे अपनी आँखों पर महसूस हो रही थी पर इस वक़्त आँखों से ढका अंधेरा ज़्यादा था।
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