
CHAPTER 33
प्राप्ति ने जैसे ही यथार्थ को अपने कमरे की बालकनी के दरवाजे पर खड़े देखा, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। होठों से मुश्किल से यथार्थ का नाम निकला था, खुद को यह यकीन दिलाने के लिए कि हां, वो सपने में नहीं थी, सच में यथार्थ उसके सामने खड़ा था।




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