
CHAPTER 31
इंदौर में चल रही वह ठंडी हवाएं आज अलग ही सुकून अपने अंदर समेटे हुए थीं। वही सुकून की ठंडी हवाएं, जो इस वक्त प्राप्ति और यथार्थ के आसपास घूम रही थीं।

CHAPTER 31
इंदौर में चल रही वह ठंडी हवाएं आज अलग ही सुकून अपने अंदर समेटे हुए थीं। वही सुकून की ठंडी हवाएं, जो इस वक्त प्राप्ति और यथार्थ के आसपास घूम रही थीं।
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