
CHAPTER 27
प्राप्ति वॉशरूम में अभी भी बेसिन के पास खड़ी अपने चेहरे पर बार बार पानी के छींटे मार रही थी। आंसुओं से उसकी आँखें जो अब भी डबडबाई हुई थी वो उन्हें छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

CHAPTER 27
प्राप्ति वॉशरूम में अभी भी बेसिन के पास खड़ी अपने चेहरे पर बार बार पानी के छींटे मार रही थी। आंसुओं से उसकी आँखें जो अब भी डबडबाई हुई थी वो उन्हें छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
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