
CHAPTER 25
सुबह के 5 बज रहे थे और अपने कमरे में बैठी प्राप्ति शून्य में ताक रही थी। वो 2 बजे घर आई थी। शुक्र था पूरे रास्ते उससे किसी ने कोई सवाल नहीं किया था।

CHAPTER 25
सुबह के 5 बज रहे थे और अपने कमरे में बैठी प्राप्ति शून्य में ताक रही थी। वो 2 बजे घर आई थी। शुक्र था पूरे रास्ते उससे किसी ने कोई सवाल नहीं किया था।
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