
CHAPTER 19
सामने एंट्रेंस पर प्राप्ति को देखते हुए प्रियतमा की जैसे सांसे रुक गई थी। वो एक तीर सा चुभने वाला शब्द जैसे उसके कानो से होते हुए हवा में गुम हो गया। उसे उन शब्दों का याद भी नहीं रहा। उन शब्दों से बढ़कर वो नजारा हर चीज की एहमियत दिखा रहा था।




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