
CHAPTER 3
माहिका तो जैसे मिहिर की छुअन का एहसास करते ही अपनी जगह जम गई। उसे मिहिर की बढ़ी धड़कनों का शोर खुद के धड़कनों के शोर में मिलता हुआ लग रहा था। सांस उथल-पुथल हो चुकी थी।

CHAPTER 3
माहिका तो जैसे मिहिर की छुअन का एहसास करते ही अपनी जगह जम गई। उसे मिहिर की बढ़ी धड़कनों का शोर खुद के धड़कनों के शोर में मिलता हुआ लग रहा था। सांस उथल-पुथल हो चुकी थी।
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